पीरियड्स और साइकल

अनियमित पीरियड्स के घरेलू उपाय: साइकल को नियमित करने का असली तरीक़ा

Dr. Megha Haldia

BAMS (Bachelor of Ayurvedic Medicine & Surgery)

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लकड़ी की मेज़ पर घर का बना भारतीय भोजन: दाल, हरी सब्ज़ी, दही, पनीर और रोटी, साथ में पिसी अलसी और दालचीनी।

छोटा जवाब: अनियमित पीरियड को नियमित करने वाले घरेलू उपाय वे हैं जो इंसुलिन, पाचन और तनाव पर काम करते हैं, न कि वे जो एक बार ब्लीडिंग करवा देते हैं। खाने में प्रोटीन और फ़ाइबर बढ़ाना, दालचीनी और मेथी, रोज़ की सैर, और पूरी नींद। असर तीन महीने में दिखता है, तीन दिन में नहीं।

आपको भी लगता है ना कि साइकल अनियमित है तो कोई एक चीज़ होगी जो इसे "ठीक" कर देगी? मेरे पास आने वाली ज़्यादातर महिलाएँ यही उम्मीद लेकर आती हैं, और मुझे उन्हें एक थोड़ी अलग बात बतानी पड़ती है।

हाँ, घरेलू उपाय काम करते हैं। मैंने अपने क्लिनिक में ऐसी महिलाएँ देखी हैं जिनकी साइकल सिर्फ़ खानपान और नींद सुधारने से महीनों बाद पहली बार अपने समय पर आई।

लेकिन जो काम करता है, वह वह नहीं है जो इंटरनेट पर सबसे ज़्यादा शेयर होता है। अनियमित पीरियड ख़ुद कोई बीमारी नहीं होता। वह इतना बता रहा होता है कि अंडा हर महीने ठीक से नहीं छूट रहा। और अंडा क्यों नहीं छूट रहा, इसका जवाब अकसर बच्चेदानी में नहीं, आपके खाने और आपके तनाव में है।

अनियमित का मतलब क्या है

पहले तय कर लें कि हम किस बारे में बात कर रहे हैं। साइकल 21 से 35 दिन के बीच हो तो नियमित मानी जाती है, और महीने-दर-महीने चार-पाँच दिन का फ़र्क़ चलता है।

अनियमित तब है जब साइकल लगातार 35 दिन से लंबी हो, या हर महीने की लंबाई में आठ दिन से ज़्यादा का उतार-चढ़ाव हो, या साल में आठ से कम पीरियड आएँ, या तीन महीने से पीरियड ही न आया हो। अगर आप महीने की शुरुआत में अंदाज़ा ही नहीं लगा पातीं कि पीरियड कब आएगा, तो वह अनियमित है।

जड़ में क्या है

अनियमित साइकल की सबसे आम कहानी भारत में यह है। शरीर पर इंसुलिन का असर कम हो जाता है, तो पैंक्रियास ज़्यादा इंसुलिन बनाता है। ज़्यादा इंसुलिन अंडाशय से एंड्रोजन (पुरुष-प्रकार के हार्मोन) बनवाता है। एंड्रोजन ज़्यादा हो तो अंडा पकता है पर छूटता नहीं। अंडा नहीं छूटा तो प्रोजेस्टेरोन नहीं बनता, और प्रोजेस्टेरोन नहीं बना तो पीरियड अपने समय पर नहीं आता।

इस पूरी गड़बड़ी को इंसुलिन रेज़िस्टेंस (insulin resistance) कहते हैं, और यही PCOS की जड़ है, जिसे अब PMOS कहा जाता है। यही वजह है कि इसमें सबसे ज़्यादा फ़र्क़ आपकी थाली से पड़ता है।

आयुर्वेद इसी बात को दूसरी भाषा में कहता है। जब अग्नि (पाचन शक्ति) मंद होती है, आम (अधपचा कचरा) बनता और जमा होता है, वह शरीर के सूक्ष्म रास्तों (स्रोतस) को जाम करता है, और कफ़ बढ़ता है। भारीपन, सुस्ती, वज़न बढ़ना और रुकी हुई साइकल, ये सब उसी तस्वीर के हिस्से हैं। इसलिए इलाज पेट से शुरू होता है।

वे घरेलू उपाय जो जड़ पर काम करते हैं

1. थाली बदलिए, यह सबसे बड़ा लीवर है

हर खाने में प्रोटीन रखिए: दाल, राजमा, छोले, पनीर, दही, अंडा, चिकन या मछली। प्रोटीन और फ़ाइबर साथ हों तो खाने के बाद शुगर और इंसुलिन का उछाल कम होता है। मैदा, चीनी, बिस्किट, मीठे पेय और तला हुआ कम कीजिए, और चावल-रोटी के साथ हमेशा सब्ज़ी और दाल रखिए। दिन में तीन बार ठीक से खाइए और बीच में लगातार चरना बंद कीजिए, क्योंकि हर बार खाने पर इंसुलिन उठता है।

यह उबाऊ लगता है, पर यह वही चीज़ है जिससे मेरे क्लिनिक में साइकल सबसे ज़्यादा सुधरती है।

2. दालचीनी

इस सूची में सबसे मज़बूत सबूत इसके साथ है। PCOS वाली महिलाओं पर हुए छोटे अध्ययनों में दालचीनी इंसुलिन की संवेदनशीलता सुधारने और साइकल को कुछ नियमित करने में मददगार पाई गई है। रोज़ चौथाई से आधा चम्मच, दूध, दलिये या चाय में। यह मीठे की तलब भी कम करती है।

3. मेथी दाना

रात को एक चम्मच मेथी पानी में भिगोकर सुबह ख़ाली पेट, पानी के साथ चबा लें। मेथी पाचन सुधारती है और शुगर के उछाल को नरम करती है। स्वाद कड़वा है, आदत पड़ जाती है।

4. अलसी और कद्दू के बीज

रोज़ एक चम्मच पिसी अलसी। अलसी में लिग्नन होते हैं जो अतिरिक्त एस्ट्रोजन को बाहर निकालने में मदद करते हैं, और ओमेगा-3 सूजन कम करता है। साबुत अलसी बिना पचे निकल जाती है, इसलिए पीसकर ही लें और डिब्बा फ़्रिज में रखें।

5. रोज़ चलिए, और थोड़ा वज़न उठाइए

रोज़ तीस मिनट तेज़ चाल से टहलना मांसपेशियों को इंसुलिन के प्रति ज़्यादा संवेदनशील बनाता है, और यह असर खाने के बाद टहलने पर सबसे अच्छा दिखता है। हफ़्ते में दो बार हलका वज़न उठाना और भी मदद करता है, क्योंकि मांसपेशी शुगर की सबसे बड़ी खपत करने वाली जगह है। ध्यान रहे, घंटों की भूखे पेट कसरत उल्टा असर करती है और साइकल बंद करवा सकती है।

6. नींद

सात से आठ घंटे, और रात को देर तक स्क्रीन नहीं। एक रात की ख़राब नींद अगले दिन इंसुलिन की संवेदनशीलता घटा देती है, यह मापा जा चुका है। नींद इस पूरी सूची में सबसे कम भाव पाने वाला इलाज है।

7. तनाव उतारने का कोई एक तरीक़ा

दस मिनट का अनुलोम-विलोम, थोड़ा योग, या बस बिना फ़ोन के टहलना। कॉर्टिसोल गिरता है तो दिमाग़ से अंडाशय तक का संकेत साफ़ होता है। कोई भी एक चीज़ रोज़ कीजिए, कई चीज़ें कभी-कभी करने से बेहतर है।

8. वज़न में थोड़ी कमी, अगर वज़न ज़्यादा है

यह सबसे कम सुनने में अच्छी लगने वाली बात है, पर सबसे असरदार है। शरीर के कुल वज़न का पाँच से दस प्रतिशत कम होने पर भी कई महिलाओं में अंडा छूटना और साइकल लौट आती है। और यह वज़न घटाने की दौड़ नहीं है, यह इंसुलिन ठीक करने का नतीजा है।

असर कब दिखेगा

यहाँ धीरज चाहिए। एक अंडे को पकने में लगभग नब्बे दिन लगते हैं, इसलिए जो आप आज खाती हैं उसका असर तीन महीने बाद की साइकल पर दिखता है। पहले महीने में कुछ न बदले तो इसका मतलब यह नहीं कि उपाय काम नहीं कर रहा।

जो पहले बदलता है वह साइकल नहीं होता: मीठे की तलब कम होना, दिन में ऊर्जा बेहतर लगना, पेट का भारीपन घटना। ये अच्छे संकेत हैं। साइकल उनके बाद आती है।

क्या नहीं करना है

वजह जाने बिना हर महीने गोली लेकर ब्लीडिंग करवा लेना। इससे कैलेंडर ठीक दिखता है और अंदर कुछ नहीं बदलता।

बहुत कम खाना या उपवास की झड़ी लगा देना भी उल्टा पड़ता है, क्योंकि शरीर भूख को ख़तरा समझकर प्रजनन का स्विच बंद कर देता है। और इंटरनेट से देखकर एक साथ पाँच-छह हर्बल पाउडर शुरू कर देना, यह भी ठीक नहीं है, ख़ासकर अगर आप थायरॉइड या कोई और दवा ले रही हैं।

जाँच जो करवा लेनी चाहिए

अगर साइकल छह महीने से अनियमित है, तो अंदाज़े पर काम करना बंद कीजिए और ये जाँच करवाइए: थायरॉइड (TSH), प्रोलैक्टिन, टेस्टोस्टेरोन, ख़ाली पेट इंसुलिन और शुगर या HOMA-IR, विटामिन D, हीमोग्लोबिन और फ़ेरिटिन, और पेल्विक सोनोग्राफ़ी। ये मिलकर बताते हैं कि मामला PCOS का है, थायरॉइड का, प्रोलैक्टिन का, या पोषण की कमी का। इलाज हर एक में अलग है, और यही वजह है कि जाँच के बाद काम आसान हो जाता है।

डॉक्टर से कब मिलें

तीन महीने से पीरियड नहीं आया, या साइकल छह महीने से गड़बड़ है, या बहुत भारी ब्लीडिंग और तेज़ दर्द हो रहा है, या पीरियड के बीच में ख़ून आ रहा है, या साथ में चेहरे पर अनचाहे बाल, मुँहासे और वज़न बढ़ना भी है, या आप गर्भधारण की कोशिश कर रही हैं और सफल नहीं हो रहा। इनमें से कोई भी बात हो तो डॉक्टर से मिलिए।

और यह भी पढ़िए: पीरियड्स जल्दी लाने के घरेलू उपाय और अनियमित पीरियड्स का आयुर्वेदिक इलाज

एक बात जो कम लोग जानते हैं

बहुत सी महिलाएँ मुझे शुगर की रिपोर्ट दिखाकर कहती हैं कि सब नॉर्मल है, तो इंसुलिन वाली बात मेरे लिए नहीं है। यहीं चूक हो जाती है।

ख़ाली पेट की शुगर सालों तक नॉर्मल बनी रह सकती है, क्योंकि शरीर उसे नॉर्मल रखने के लिए चुपचाप ज़्यादा से ज़्यादा इंसुलिन बनाता रहता है। रिपोर्ट में शुगर ठीक दिखती है और परदे के पीछे इंसुलिन बढ़ा हुआ होता है, और अंडाशय (ओवरी) पर असर उसी बढ़े हुए इंसुलिन का पड़ता है, शुगर का नहीं। इसीलिए मैं शुगर के साथ ख़ाली पेट इंसुलिन या HOMA-IR भी करवाती हूँ। नॉर्मल शुगर की रिपोर्ट इंसुलिन रेज़िस्टेंस को ख़ारिज नहीं करती।

PCOS को पूरा समझना है?

अनियमित पीरियड की सबसे आम वजह PCOS है, और उसे आधा-अधूरा समझने से इलाज भी आधा-अधूरा रहता है। लक्षण, कारण, PCOD से फ़र्क़, ज़रूरी जाँचें और इलाज, सब एक जगह: PCOS क्या है: लक्षण, कारण और इलाज की पूरी गाइड

जब आपको अपने लिए बना प्लान चाहिए

कोई भी लेख आपकी रिपोर्ट नहीं पढ़ सकता। यह बता सकता है कि क्या होता है और क्यों, लेकिन आपकी देरी की वजह थायरॉइड है, PCOS है, वज़न है या तनाव, यह जानने के लिए किसी को आपका पूरा इतिहास देखना पड़ता है। Qura में यही होता है। हमारी BAMS आयुर्वेदिक डॉक्टर आपसे 45 मिनट बात करती हैं, आपकी रिपोर्ट देखती हैं, और डाइट, आयुर्वेदिक दवा और नियमित फ़ॉलो-अप को मिलाकर 90 दिन का प्लान बनाती हैं जो जड़ पर काम करे।

हम यह नहीं कहेंगे कि PCOS ठीक हो जाएगा, क्योंकि कोई ईमानदार डॉक्टर यह नहीं कहता। हम यह कर सकते हैं कि आपकी साइकल के पीछे की असली वजह ढूँढें और उस पर काम करें।

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यह लेख जानकारी के लिए है और एक BAMS चिकित्सक द्वारा समीक्षित है। यह आपकी व्यक्तिगत चिकित्सकीय सलाह की जगह नहीं ले सकता। पीरियड्स की गड़बड़ी के कई कारण होते हैं, इसलिए कोई भी जड़ी-बूटी या इलाज शुरू या बंद करने से पहले किसी योग्य डॉक्टर से मिलें, ख़ासकर अगर आप गर्भवती हों, स्तनपान करा रही हों, या कोई दवा ले रही हों।

लिखा गया: डॉ. मेघा हल्दिया (BAMS), Qura Nutrition। (लेखिका का परिचय अंग्रेज़ी में है।)

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

अनियमित पीरियड्स को नियमित करने में कितना समय लगता है?

आमतौर पर तीन से छह महीने, क्योंकि एक अंडा तैयार होने में ही करीब तीन महीने लेता है। इसलिए आज के बदलाव का असर तीन महीने बाद की साइकल में दिखता है। इससे पहले जो बदलता है वह मीठे की तलब, ऊर्जा और पेट का भारीपन होता है, और वे अच्छे संकेत हैं।

अनियमित पीरियड्स में क्या खाना चाहिए?

हर खाने में प्रोटीन (दाल, छोले, पनीर, दही, अंडा, मछली) और फ़ाइबर वाली सब्ज़ियाँ रखें, रोज़ एक चम्मच पिसी अलसी और चौथाई से आधा चम्मच दालचीनी लें, और मैदा, चीनी, मीठे पेय और तले हुए को कम करें। गरम, पका और ताज़ा खाना खाएँ और नाश्ता न छोड़ें।

क्या अनियमित पीरियड्स का मतलब PCOS ही है?

नहीं, हालाँकि भारत में यह सबसे आम वजह है। थायरॉइड की गड़बड़ी, प्रोलैक्टिन बढ़ना, बहुत तेज़ी से वज़न घटना या बढ़ना, ज़्यादा कसरत, लगातार तनाव और ख़ून की कमी भी साइकल अनियमित कर सकते हैं। इसीलिए इलाज से पहले जाँच ज़रूरी है, क्योंकि हर वजह का इलाज अलग है।

दालचीनी कितनी और कैसे लेनी चाहिए?

रोज़ चौथाई से आधा चम्मच, दूध, दलिये, चाय या छाछ में मिलाकर। PCOS वाली महिलाओं पर हुए छोटे अध्ययनों में यह इंसुलिन की संवेदनशीलता सुधारने और साइकल को कुछ नियमित करने में मददगार पाई गई है। बहुत ज़्यादा लेने से फ़ायदा नहीं बढ़ता, इसलिए मात्रा कम और नियमित रखें।

अनियमित पीरियड्स में गर्भधारण हो सकता है?

हाँ, हो सकता है, पर मुश्किल ज़्यादा होती है क्योंकि अंडा हर महीने भरोसे से नहीं छूटता और अंडाशय से अंडा छूटने का समय पकड़ना कठिन होता है। अच्छी ख़बर यह है कि जिन बदलावों से साइकल नियमित होती है, वही अंडा छूटने की संभावना भी सुधारते हैं। अगर आप कोशिश कर रही हैं, तो जाँच करवाकर डॉक्टर की देखरेख में काम कीजिए।

वज़न कम करने से पीरियड नियमित हो जाते हैं?

अगर वज़न ज़्यादा है, तो कुल वज़न का पाँच से दस प्रतिशत कम होने पर भी कई महिलाओं में अंडा छूटना और नियमित साइकल लौट आती है। असली काम इंसुलिन ठीक होना है, वज़न का घटना उसका नतीजा है। दूसरी तरफ़, बहुत कम वज़न और बहुत कम खाना भी पीरियड बंद करवा देता है।

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