समय से पहले पीरियड आने के 10 कारण: कब सामान्य है और कब जाँच ज़रूरी है
BAMS (Bachelor of Ayurvedic Medicine & Surgery)

छोटा जवाब: साइकल 21 दिन या उससे ज़्यादा की हो तो जल्दी आना अकसर सामान्य है, और महीने-दर-महीने कुछ दिन का फ़र्क़ चलता है। चिंता तब है जब साइकल लगातार 21 दिन से छोटी हो, महीने में दो बार ब्लीडिंग हो, या साथ में भारी ब्लीडिंग, तेज़ दर्द या बहुत थकान हो।
पिछला पीरियड ख़त्म हुआ और अठारहवें दिन फिर शुरू। ऐसा हो तो पहला ख़याल आता है कि कुछ गड़बड़ है। सही है ना?
हाँ, कुछ मामलों में यह जाँच की बात होती है, और उन्हें पहचानना ज़रूरी है।
लेकिन इससे पहले एक राहत की बात: "समय से पहले" का मतलब हर बार बीमारी नहीं होता। एक स्वस्थ साइकल 21 से 35 दिन के बीच कहीं भी हो सकती है, यानी अगर आपकी साइकल 24 दिन की है, तो वह छोटी है पर सामान्य है। और किसी एक महीने का जल्दी आना अकसर सिर्फ़ यह बता रहा होता है कि उस महीने आपके शरीर पर कुछ दबाव था।
तो पहले यह तय कीजिए कि आपकी अपनी साइकल की लंबाई क्या है, और उस महीने वह कितनी छोटी हुई। असल सवाल यही है।
1. तनाव और नींद की गड़बड़ी
सबसे आम कारण, और सबसे कम गंभीरता से लिया जाने वाला। तनाव में कॉर्टिसोल बढ़ता है और वह अंडा छूटने के समय को आगे-पीछे कर देता है। अंडा जल्दी छूटा तो पीरियड भी जल्दी आ जाता है। रात की शिफ़्ट, परीक्षा, नींद की कमी और लंबा सफ़र, ये सब यही करते हैं।
2. थायरॉइड की गड़बड़ी
थायरॉइड पूरे शरीर की रफ़्तार तय करता है, और साइकल की भी। थायरॉइड तेज़ (हाइपरथायरॉइड) हो तो साइकल छोटी और ब्लीडिंग कम हो सकता है; धीमा (हाइपोथायरॉइड) हो तो अकसर भारी और अनियमित। साथ में थकान, वज़न में बदलाव, बाल झड़ना या ठंड-गर्मी सहन न होना दिखे तो TSH करवा लीजिए। यह सस्ती जाँच है और बहुत कुछ साफ़ कर देती है।
3. PCOS और अंडा न छूटना
PCOS का नाम अकसर देर से आने वाले पीरियड के साथ जुड़ा है, पर हमेशा ऐसा नहीं होता। जब अंडा नहीं छूटता तो प्रोजेस्टेरोन नहीं बनता, और उसके बिना बच्चेदानी की परत बेतरतीब बनती और टूटती रहती है। नतीजा कभी लंबी देरी, कभी बीच में ब्लीडिंग, कभी दो पीरियड बहुत पास-पास। साथ में अनचाहे बाल, मुँहासे या वज़न बढ़ना हो तो जाँच करवाइए।
4. प्रोजेस्टेरोन की कमी (छोटा ल्यूटियल फ़ेज़)
अंडा छूटने के बाद का हिस्सा आमतौर पर बारह से चौदह दिन का होता है। अगर प्रोजेस्टेरोन कम बने तो यह हिस्सा छोटा पड़ जाता है और पीरियड जल्दी आ जाता है, कभी हलके धब्बों के साथ। यह तनाव, कम वज़न, ज़्यादा कसरत और थायरॉइड से जुड़ा हो सकता है, और गर्भधारण की कोशिश में यह मायने रखता है।
5. गर्भनिरोधक गोली शुरू या बंद करना
गोली शुरू करने के बाद पहले दो-तीन महीनों में बीच में ब्लीडिंग या जल्दी पीरियड आना आम है, और अकसर अपने आप बैठ जाता है। इमरजेंसी गोली (जैसे i-pill) लेने के बाद अगली साइकल आगे-पीछे हो जाना भी सामान्य है। गोली बंद करने पर शरीर को अपनी लय पकड़ने में कुछ महीने लगते हैं।
6. वज़न में तेज़ बदलाव, ज़्यादा कसरत, कम खाना
चर्बी की मात्रा हार्मोन के लिए मायने रखती है। बहुत तेज़ी से वज़न घटाना, बहुत कम खाना या घंटों की कड़ी कसरत साइकल को अनियमित कर देती है, कभी छोटी, कभी बंद। दूसरी तरफ़ तेज़ी से वज़न बढ़ना भी वही गड़बड़ी करता है।
7. फ़ाइब्रॉइड और पॉलिप
बच्चेदानी में गाँठ (फ़ाइब्रॉइड) या परत में छोटी वृद्धि (पॉलिप) से बीच में या बहुत भारी ब्लीडिंग, और पास-पास पीरियड हो सकते हैं। ये आम हैं, अकसर गंभीर नहीं, पर सोनोग्राफ़ी से पता लगाना और इलाज तय करना ज़रूरी है, ख़ासकर अगर ब्लीडिंग भारी हो।
8. संक्रमण और सूजन
पेल्विक संक्रमण या सर्वाइकल सूजन से भी बीच में या जल्दी ब्लीडिंग हो सकती है, अकसर स्राव, बदबू, संबंध के दौरान दर्द या बुख़ार के साथ। यह इंतज़ार करने वाली चीज़ नहीं है, इलाज चाहिए।
9. पेरीमेनोपॉज़, चालीस के आसपास
चालीस के बाद (कभी उससे पहले भी) साइकल की लंबाई बदलने लगती है, और अकसर पहले छोटी होती है, फिर लंबी और अनियमित। साथ में गर्मी के झोंके, नींद टूटना और मिज़ाज में बदलाव दिख सकता है। यह उम्र का एक पड़ाव है, बीमारी नहीं, पर भारी ब्लीडिंग को सामान्य मानकर छोड़ना नहीं चाहिए।
10. ख़ून की कमी और पोषण की कमी
यह कारण भी है और नतीजा भी। बार-बार और भारी ब्लीडिंग से आयरन घटता है, और आयरन घटने से थकान और कमज़ोरी बढ़ती है। भारतीय महिलाओं में यह बहुत आम है और बहुत बार छूट जाता है। हीमोग्लोबिन के साथ फ़ेरिटिन भी करवाइए, क्योंकि फ़ेरिटिन पहले गिरता है।
आयुर्वेद इसे कैसे पढ़ता है
आयुर्वेद में समय से पहले और भारी रक्तस्राव को अकसर पित्त की अधिकता से जोड़ा जाता है। पित्त गर्मी और तीक्ष्णता का दोष है, और बढ़ा हुआ पित्त परत को समय से पहले तोड़ देता है। इसीलिए बहुत तेज़ मिर्च-मसाला, बहुत खट्टा और तला हुआ, बहुत ज़्यादा चाय-कॉफ़ी, धूप में ज़्यादा रहना, गुस्सा और कम नींद, ये सब इस स्थिति में भारी पड़ते हैं।
ठंडी तासीर की चीज़ें यहाँ मदद करती हैं: धनिये के बीज का पानी, आँवला, नारियल पानी, घी, दूध, और हलका ठंडा खाना। ध्यान दीजिए, यह सलाह देर से आने वाले पीरियड की सलाह से उलटी है। आयुर्वेद इन दोनों को एक ही समस्या नहीं मानता, और इसीलिए इलाज भी अलग होता है।
जाँच जो अकसर काम आती है
अगर यह पैटर्न दो-तीन महीने चल रहा है, तो ये करवाइए: TSH, हीमोग्लोबिन और फ़ेरिटिन, प्रोलैक्टिन, ज़रूरत पर टेस्टोस्टेरोन और इंसुलिन, और पेल्विक सोनोग्राफ़ी। उम्र चालीस के पास हो तो डॉक्टर FSH और दूसरी जाँचें जोड़ सकती हैं।
डॉक्टर से कब मिलें
मिलिए अगर साइकल लगातार 21 दिन से छोटी है, अगर महीने में दो बार ब्लीडिंग हो रहा है, अगर ब्लीडिंग भारी है (हर एक-दो घंटे में पैड बदलना पड़े, या थक्के आएँ), अगर सात दिन से ज़्यादा चलती है, अगर संबंध के बाद या पीरियड के बीच में ख़ून आता है, अगर बहुत थकान और चक्कर हैं, या अगर मेनोपॉज़ के बाद कभी भी रक्तस्राव हो। आख़िरी वाली बात कभी नज़रअंदाज़ न कीजिए।
यह भी पढ़िए: पीरियड्स में देरी: कारण और इलाज और अनियमित पीरियड्स के घरेलू उपाय।
PCOS को पूरा समझना है?
अनियमित पीरियड की सबसे आम वजह PCOS है, और उसे आधा-अधूरा समझने से इलाज भी आधा-अधूरा रहता है। लक्षण, कारण, PCOD से फ़र्क़, ज़रूरी जाँचें और इलाज, सब एक जगह: PCOS क्या है: लक्षण, कारण और इलाज की पूरी गाइड।
जब आपको अपने लिए बना प्लान चाहिए
कोई भी लेख आपकी रिपोर्ट नहीं पढ़ सकता। यह बता सकता है कि क्या होता है और क्यों, लेकिन आपकी देरी की वजह थायरॉइड है, PCOS है, वज़न है या तनाव, यह जानने के लिए किसी को आपका पूरा इतिहास देखना पड़ता है। Qura में यही होता है। हमारी BAMS आयुर्वेदिक डॉक्टर आपसे 45 मिनट बात करती हैं, आपकी रिपोर्ट देखती हैं, और डाइट, आयुर्वेदिक दवा और नियमित फ़ॉलो-अप को मिलाकर 90 दिन का प्लान बनाती हैं जो जड़ पर काम करे।
हम यह नहीं कहेंगे कि PCOS ठीक हो जाएगा, क्योंकि कोई ईमानदार डॉक्टर यह नहीं कहता। हम यह कर सकते हैं कि आपकी साइकल के पीछे की असली वजह ढूँढें और उस पर काम करें।
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यह लेख जानकारी के लिए है और एक BAMS चिकित्सक द्वारा समीक्षित है। यह आपकी व्यक्तिगत चिकित्सकीय सलाह की जगह नहीं ले सकता। पीरियड्स की गड़बड़ी के कई कारण होते हैं, इसलिए कोई भी जड़ी-बूटी या इलाज शुरू या बंद करने से पहले किसी योग्य डॉक्टर से मिलें, ख़ासकर अगर आप गर्भवती हों, स्तनपान करा रही हों, या कोई दवा ले रही हों।
लिखा गया: डॉ. मेघा हल्दिया (BAMS), Qura Nutrition। (लेखिका का परिचय अंग्रेज़ी में है।)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
पीरियड समय से पहले आना सामान्य है या चिंता की बात?
अगर आपकी साइकल 21 दिन या उससे लंबी है, तो जल्दी आना अकसर सामान्य होता है, और किसी एक महीने कुछ दिन का फ़र्क़ आ जाना भी आम है। चिंता तब है जब साइकल लगातार 21 दिन से छोटी हो, महीने में दो बार ब्लीडिंग हो, या साथ में भारी ब्लीडिंग, तेज़ दर्द या बहुत थकान हो।
महीने में दो बार पीरियड आना किस वजह से होता है?
सबसे आम वजहें हैं तनाव और नींद की गड़बड़ी, थायरॉइड की समस्या, अंडा न छूटना (जैसे PCOS में), प्रोजेस्टेरोन की कमी, गर्भनिरोधक गोली शुरू या बंद करना, फ़ाइब्रॉइड या पॉलिप, संक्रमण, और चालीस के आसपास पेरीमेनोपॉज़। दो-तीन महीने ऐसा चले तो जाँच करवाइए।
क्या तनाव से पीरियड जल्दी आ सकता है?
हाँ। तनाव में कॉर्टिसोल बढ़ता है और अंडा छूटने का समय बदल जाता है। अंडा जल्दी छूटे तो पीरियड भी जल्दी आ जाता है। रात की शिफ़्ट, नींद की कमी, परीक्षा और लंबा सफ़र इसकी आम वजहें हैं, और नींद तथा दिनचर्या सुधरने पर यह अकसर अपने आप ठीक हो जाता है।
समय से पहले पीरियड आने पर कौन सी जाँच करवाएँ?
आमतौर पर TSH (थायरॉइड), हीमोग्लोबिन और फ़ेरिटिन, प्रोलैक्टिन, और पेल्विक सोनोग्राफ़ी। PCOS की निशानियाँ हों तो टेस्टोस्टेरोन और इंसुलिन भी। चालीस के आसपास डॉक्टर FSH जैसी जाँचें जोड़ सकती हैं। फ़ेरिटिन ज़रूरी है क्योंकि वह हीमोग्लोबिन से पहले गिरता है।
आयुर्वेद में समय से पहले पीरियड आने को कैसे देखा जाता है?
इसे अकसर पित्त की अधिकता से जोड़ा जाता है, यानी शरीर में गर्मी और तीक्ष्णता बढ़ी हुई है, जो परत को समय से पहले तोड़ देती है। इसलिए बहुत मिर्च-मसाला, खट्टा, तला हुआ, ज़्यादा चाय-कॉफ़ी और कम नींद भारी पड़ते हैं, और धनिये के बीज का पानी, आँवला, नारियल पानी, दूध और घी जैसी ठंडी तासीर की चीज़ें मदद करती हैं।
जल्दी पीरियड आने से गर्भधारण पर असर पड़ता है?
पड़ सकता है, ख़ासकर अगर अंडा छूटने के बाद का हिस्सा (ल्यूटियल फ़ेज़) बहुत छोटा हो या अंडा भरोसे से न छूटे। इससे गर्भ ठहरने के लिए ज़रूरी प्रोजेस्टेरोन का सहारा कम पड़ जाता है। अगर आप कोशिश कर रही हैं और साइकल छोटी है, तो जाँच करवाकर डॉक्टर से बात कीजिए।
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