पीरियड्स और साइकल

पीरियड्स जल्दी लाने के घरेलू उपाय: क्या असल में काम करता है और क्या नहीं

Dr. Megha Haldia

BAMS (Bachelor of Ayurvedic Medicine & Surgery)

9 मिनट पढ़ें
रसोई की धूप में अजवाइन का गुनगुना पानी, तिल, गुड़, अदरक और दालचीनी, पीछे एक कप लिए खड़ी युवती।

छोटा जवाब: कोई भी घरेलू उपाय आपके पीरियड को तारीख़ देकर नहीं बुला सकता। जो चीज़ें असल में मदद करती हैं, वे उस साइकल को सहारा देती हैं जो पहले से आने की कोशिश कर रही है: पाचन ठीक करना और तनाव कम करना। अगर देरी हर महीने की आदत बन गई है, तो उपाय नहीं, वजह ढूँढनी है।

तारीख़ निकल गई और अब तक कुछ नहीं हुआ, और आप गूगल पर "पीरियड जल्दी लाने का उपाय" ढूँढ रही हैं। सही है ना? मैं क्लिनिक में यह सवाल हफ़्ते में कई बार सुनती हूँ, और अक्सर घबराहट के साथ।

हाँ, कुछ चीज़ें सच में मदद करती हैं। अजवाइन का पानी, गुड़, तिल, अदरक: ये आयुर्वेद में सदियों से इसी काम के लिए इस्तेमाल होते आए हैं, और इनके पीछे एक साफ़ तर्क है।

लेकिन एक बात पहले साफ़ कर दूँ, क्योंकि इंटरनेट यह नहीं बताता। कोई भी चाय, कोई बीज, कोई आसन आपके पीरियड को कल सुबह नहीं ला सकता। पीरियड आता है जब आपके हार्मोन का पूरा चक्र पूरा होता है, और उस चक्र में तीन से चार हफ़्ते लगते हैं। घरेलू उपाय उस चक्र को पूरा होने में मदद कर सकते हैं। उसे छलाँग नहीं लगवा सकते।

पहले एक ज़रूरी बात: कहीं आप गर्भवती नहीं हैं?

अगर आपने असुरक्षित संबंध बनाए हैं और पीरियड मिस हुआ है, तो कोई भी घरेलू उपाय आज़माने से पहले प्रेगनेंसी टेस्ट कर लें। यह पहला कदम है, आख़िरी नहीं।

यह लेख पीरियड टालने या गर्भ रोकने के बारे में नहीं है, और नीचे दी गई कोई भी चीज़ उस काम के लिए न इस्तेमाल करें। अगर टेस्ट पॉज़िटिव है, तो अजवाइन-पपीता-तिल वाली सलाह आपके लिए नहीं है, डॉक्टर से मिलना है। और अगर टेस्ट नेगेटिव है, तब आगे पढ़िए, क्योंकि तब सवाल यह बनता है कि शरीर ने साइकल पूरी क्यों नहीं की।

देरी कब सामान्य है और कब नहीं

एक बात से राहत मिलेगी: हर देरी बीमारी नहीं होती। एक स्वस्थ साइकल 21 से 35 दिन के बीच कहीं भी हो सकती है, और साल में एक-दो बार आगे-पीछे हो जाना बिल्कुल आम है। एक बार की देरी अकसर सिर्फ़ इतना बता रही होती है कि पिछले महीने आपका शरीर किसी दबाव में था।

चिंता की बात तब है जब यह पैटर्न बन जाए। अगर आपकी साइकल लगातार 35 दिन से लंबी है, अगर तीन महीने से पीरियड नहीं आया, या अगर हर महीने तारीख़ का अंदाज़ा ही नहीं लगता, तो शरीर सिर्फ़ देर नहीं कर रहा। वह कुछ बता रहा है। उस पर हम नीचे आते हैं।

देरी के पीछे असल में क्या होता है

आयुर्वेद में पीरियड की चाल को वात संभालता है। वात वह ऊर्जा है जो शरीर में हर तरह की गति चलाती है: साँस, नसों के संकेत, और नीचे की तरफ़ का बहाव भी, जिसे अपान वायु कहते हैं। जब वात बिगड़ता है, गति अनियमित हो जाती है। इसीलिए ठंड, सूखा खाना, कम नींद, ज़्यादा भागदौड़ और लंबी भूख, ये सब पीरियड को आगे धकेल देते हैं। ये सब वात बढ़ाने वाली चीज़ें हैं।

दूसरा हिस्सा है अग्नि, यानी आपकी पाचन शक्ति। जब पाचन सुस्त पड़ता है, शरीर में आम (अधपचा चिपचिपा कचरा) जमा होता है, और वह उन रास्तों को जाम कर देता है जिनसे हार्मोन का संदेश चलता है। इसलिए आयुर्वेद पीरियड की गड़बड़ी में इलाज पेट से शुरू करता है। यह अजीब लगता है, पर यही वजह है कि जिन महिलाओं का पाचन ठीक हो जाता है, उनकी साइकल भी अकसर अपने आप सुधरने लगती है।

आधुनिक भाषा में भी यही बात है। तनाव का हार्मोन कॉर्टिसोल बढ़ता है, तो दिमाग़ अंडाशय को भेजा जाने वाला संकेत धीमा कर देता है। शरीर की सोच सीधी है: जब हालात कठिन हों, प्रजनन इंतज़ार कर सकता है। इसलिए परीक्षा, शिफ़्ट की नौकरी, अचानक डाइटिंग या बीमारी के बाद पीरियड खिसक जाना बहुत आम है।

घरेलू उपाय जो सच में कुछ करते हैं

ये चीज़ें साइकल को सहारा देती हैं, और इनमें से कोई भी अकेले जादू नहीं करती।

1. अजवाइन का पानी

एक चम्मच अजवाइन एक गिलास पानी में उबालकर, गुनगुना, दिन में एक बार। अजवाइन उष्ण (गर्म तासीर वाली) है और पाचन की आग बढ़ाती है, साथ ही पेट की ऐंठन ढीली करती है। पीरियड से पहले के दिनों में यह भारीपन और गैस दोनों में आराम देती है। यह सबसे सस्ता और सबसे कम आँका जाने वाला उपाय है।

2. गुड़ के साथ तिल

काले तिल और गुड़, दोनों गर्म तासीर के हैं और परंपरा में इन्हें अपान वायु का बहाव खोलने वाला माना जाता है। सर्दियों में एक छोटा तिल-गुड़ का लड्डू, या एक चम्मच भुने तिल गुड़ के साथ, पीरियड से एक हफ़्ता पहले से लेना ठीक रहता है। गर्मियों में मात्रा कम रखें, वरना गर्मी ज़्यादा पड़ जाती है।

3. अदरक और दालचीनी

अदरक की चाय पाचन और रक्त-संचार दोनों सुधारती है। दालचीनी पर थोड़ा असली शोध भी है: PCOS वाली महिलाओं में यह इंसुलिन की संवेदनशीलता सुधारने और साइकल को नियमित करने में मदद कर सकती है। रोज़ चौथाई चम्मच दालचीनी दूध या दलिये में, यह इस सूची में सबसे मज़बूत सबूत वाली चीज़ है।

4. कच्चा पपीता

सबसे मशहूर उपाय, और सबसे ग़लत समझा गया। कच्चे पपीते में पपेन होता है, और परंपरा में इसे बच्चेदानी की मांसपेशी को हरकत देने वाला माना जाता है। पका पपीता वह काम नहीं करता। यह पीरियड से पहले के दिनों में मददगार हो सकता है, पर याद रखिए: यह प्रेगनेंसी में सुरक्षित नहीं है, इसलिए पहले टेस्ट।

5. हल्दी वाला दूध

हल्दी सूजन कम करती है और गर्म तासीर की है। रात को गुनगुने दूध में चौथाई चम्मच हल्दी, यह एक अच्छी आदत है जो साइकल के दर्द में भी काम आती है। इससे तारीख़ नहीं बदलेगी, पर शरीर का माहौल बेहतर होता है।

6. जो भोजन वात को शांत करता है

ठंडा, सूखा और बासी खाना छोड़कर गरम, पका, थोड़े घी वाला खाना खाइए। मूंग की दाल की खिचड़ी, घी, सब्ज़ी का सूप, भीगे बादाम और खजूर। नाश्ता न छोड़िए। लंबी भूख वात को सबसे तेज़ बढ़ाती है, और डाइटिंग के चक्कर में पीरियड खिसकाने वाली लड़कियाँ मैंने बहुत देखी हैं।

7. हलकी हरकत, ज़्यादा नहीं

रोज़ बीस-तीस मिनट तेज़ चाल से टहलना कमर और पेट का रक्त-संचार सुधारता है और तनाव उतारता है। योग में मलासन, बद्धकोणासन और सेतुबंधासन उसी हिस्से को खोलते हैं। लेकिन इसका उल्टा भी सच है: बहुत ज़्यादा और भूखे पेट की कड़ी कसरत पीरियड बंद करवा देती है। जिम में घंटे बढ़ाने से साइकल नहीं आती।

8. नींद और तनाव

यह सूची में सबसे उबाऊ और सबसे असरदार चीज़ है। सात-आठ घंटे की नींद और दिन में दस मिनट का शांत साँस-अभ्यास कॉर्टिसोल गिराता है, और कॉर्टिसोल गिरने से वह संकेत लौटता है जो अंडाशय तक जाता है। जिन मरीज़ों ने बस नींद ठीक की, उनकी साइकल भी अकसर ठीक हुई है।

जो चीज़ें काम नहीं करतीं

ईमानदारी से: पीरियड लाने की गोली या इंजेक्शन ख़ुद से लेना ठीक नहीं है। इनसे ब्लीडिंग तो हो जाती है, पर वह असली पीरियड नहीं होता, और असली वजह वहीं रह जाती है। हर महीने यह करने से गड़बड़ी बढ़ती है, घटती नहीं। ऐसी दवाएँ डॉक्टर की सलाह पर ही, वजह पता होने के बाद।

और बहुत गर्म तासीर वाली चीज़ें ढेर सारी मात्रा में लेने से भी कुछ नहीं होता, सिवाय एसिडिटी, जलन और कभी-कभी बहुत भारी ब्लीडिंग के। "ज़्यादा लेने से जल्दी आएगा" यह सोच काम नहीं करती।

अगर देरी हर महीने की बात है, तो वजह ढूँढिए

यहाँ मैं थोड़ा सख़्त होना चाहूँगी। बार-बार देर से आने वाले पीरियड को हर महीने घरेलू उपाय से धकेलना, बुख़ार में बार-बार ठंडा पानी डालना जैसा है। असली सवाल यह है कि आपका शरीर साइकल पूरी क्यों नहीं कर पा रहा।

संभावित वजहसाथ में क्या दिखता हैक्या जाँचें
PCOS (अब PMOS)लंबी साइकल, चेहरे पर अनचाहे बाल, मुँहासे, वज़न बढ़ना, सिर के बाल पतले होनापेल्विक सोनोग्राफ़ी, टेस्टोस्टेरोन, इंसुलिन या HOMA-IR
थायरॉइडथकान, वज़न में बदलाव, ठंड लगना, बाल झड़नाTSH
प्रोलैक्टिन बढ़ा होनास्तन से स्राव, सिरदर्दप्रोलैक्टिन
तनाव, कम वज़न, ज़्यादा कसरतहाल में डाइटिंग, तेज़ी से वज़न घटना, बहुत ज़्यादा वर्कआउटवज़न और खाने की आदतों की समीक्षा
ख़ून की कमी और पोषण की कमीकमज़ोरी, साँस फूलना, पीलापनहीमोग्लोबिन, फ़ेरिटिन, विटामिन D, B12

PCOS और देर से आने वाले पीरियड

भारत में लगातार देर से आने वाले पीरियड की सबसे आम वजह PCOS है, जिसे अब PMOS कहा जा रहा है। इसमें होता यह है कि शरीर पर इंसुलिन का असर कम हो जाता है, इंसुलिन ज़्यादा बनता है, और ज़्यादा इंसुलिन अंडाशय से पुरुष-प्रकार के हार्मोन (एंड्रोजन) बनवाता है। ये एंड्रोजन अंडे को पकने और छूटने नहीं देते, और अंडा नहीं छूटा तो पीरियड भी अपने समय पर नहीं आता।

इसलिए PCOS में सिर्फ़ पीरियड लाने की कोशिश अधूरी है। इंसुलिन पर काम करना पड़ता है, और वह काम खाने से शुरू होता है। इस बारे में हमने अलग से लिखा है: अनियमित पीरियड्स के घरेलू उपाय और अनियमित पीरियड्स का आयुर्वेदिक इलाज

डॉक्टर से कब मिलना चाहिए

डॉक्टर से मिलिए अगर तीन महीने से पीरियड नहीं आया, अगर साइकल लगातार 35 दिन से लंबी है, अगर बहुत भारी ब्लीडिंग या तेज़ दर्द हो रहा है, अगर पीरियड के बीच में ख़ून आ रहा है, या अगर देरी के साथ अनचाहे बाल, मुँहासे और वज़न बढ़ना भी चल रहा है। और अगर प्रेगनेंसी की संभावना है, तो पहले टेस्ट, फिर डॉक्टर।

देर करने का नुक़सान यह है कि PCOS जैसी स्थिति जितनी देर बिना इलाज रहती है, इंसुलिन और वज़न का चक्र उतना गहरा होता जाता है। जल्दी पकड़ लेने पर काम बहुत आसान होता है।

एक बात जो कम लोग जानते हैं

अंडा छूटने के बाद पीरियड आने तक का समय लगभग तय होता है, बारह से चौदह दिन, और वह आसानी से बदलता नहीं। बदलता है उससे पहले का हिस्सा, यानी अंडा छूटने में कितने दिन लगे।

इसका मतलब यह है कि आपका पीरियड देर से नहीं आया। आपका ओव्यूलेशन देर से हुआ, और पीरियड ने उसके पीछे-पीछे अपनी तारीख़ खिसका दी। इसीलिए तारीख़ के दो दिन पहले अजवाइन का पानी पीने से कुछ नहीं बदलता, और पूरे महीने खाना, नींद और तनाव संभालने से बदल जाता है। आप पीरियड को नहीं बुला रही होतीं, आप अंडे को समय पर छूटने में मदद कर रही होती हैं।

PCOS को पूरा समझना है?

अनियमित पीरियड की सबसे आम वजह PCOS है, और उसे आधा-अधूरा समझने से इलाज भी आधा-अधूरा रहता है। लक्षण, कारण, PCOD से फ़र्क़, ज़रूरी जाँचें और इलाज, सब एक जगह: PCOS क्या है: लक्षण, कारण और इलाज की पूरी गाइड

जब आपको अपने लिए बना प्लान चाहिए

कोई भी लेख आपकी रिपोर्ट नहीं पढ़ सकता। यह बता सकता है कि क्या होता है और क्यों, लेकिन आपकी देरी की वजह थायरॉइड है, PCOS है, वज़न है या तनाव, यह जानने के लिए किसी को आपका पूरा इतिहास देखना पड़ता है। Qura में यही होता है। हमारी BAMS आयुर्वेदिक डॉक्टर आपसे 45 मिनट बात करती हैं, आपकी रिपोर्ट देखती हैं, और डाइट, आयुर्वेदिक दवा और नियमित फ़ॉलो-अप को मिलाकर 90 दिन का प्लान बनाती हैं जो जड़ पर काम करे।

हम यह नहीं कहेंगे कि PCOS ठीक हो जाएगा, क्योंकि कोई ईमानदार डॉक्टर यह नहीं कहता। हम यह कर सकते हैं कि आपकी साइकल के पीछे की असली वजह ढूँढें और उस पर काम करें।

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यह लेख जानकारी के लिए है और एक BAMS चिकित्सक द्वारा समीक्षित है। यह आपकी व्यक्तिगत चिकित्सकीय सलाह की जगह नहीं ले सकता। पीरियड्स की गड़बड़ी के कई कारण होते हैं, इसलिए कोई भी जड़ी-बूटी या इलाज शुरू या बंद करने से पहले किसी योग्य डॉक्टर से मिलें, ख़ासकर अगर आप गर्भवती हों, स्तनपान करा रही हों, या कोई दवा ले रही हों।

लिखा गया: डॉ. मेघा हल्दिया (BAMS), Qura Nutrition। (लेखिका का परिचय अंग्रेज़ी में है।)

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

पीरियड्स जल्दी लाने का सबसे तेज़ घरेलू उपाय क्या है?

ईमानदार जवाब यह है कि कोई उपाय पीरियड को एक-दो दिन में नहीं ला सकता, क्योंकि हार्मोन का पूरा चक्र तीन से चार हफ़्ते का होता है। जो सबसे भरोसेमंद मदद करते हैं वे हैं अजवाइन का पानी, अदरक और दालचीनी, गुड़ के साथ तिल, गरम और पका भोजन, रोज़ की सैर और पूरी नींद। ये उस साइकल को सहारा देते हैं जो आने की कोशिश कर रही है।

क्या कच्चा पपीता खाने से पीरियड आ जाता है?

कच्चे पपीते में पपेन होता है और परंपरा में इसे बच्चेदानी की मांसपेशी को हरकत देने वाला माना जाता है, इसलिए पीरियड से पहले के दिनों में यह कुछ महिलाओं को मदद करता है। पका पपीता यह काम नहीं करता, और इसका असर हर किसी पर एक जैसा नहीं होता। गर्भावस्था में कच्चा पपीता सुरक्षित नहीं है, इसलिए पहले प्रेगनेंसी टेस्ट कर लें।

पीरियड कितने दिन लेट होना सामान्य है?

साल में एक या दो बार पाँच से सात दिन की देरी आम है, ख़ासकर तनाव, बीमारी, सफ़र या नींद की गड़बड़ी के बाद। एक स्वस्थ साइकल 21 से 35 दिन के बीच होती है। लेकिन अगर देरी हर महीने हो रही है, साइकल 35 दिन से लंबी रहती है, या तीन महीने से पीरियड नहीं आया, तो जाँच करवाना ज़रूरी है।

तनाव से पीरियड लेट हो सकता है?

हाँ, और यह बहुत आम है। लगातार तनाव में कॉर्टिसोल बढ़ता है, जिससे दिमाग़ से अंडाशय तक जाने वाला संकेत धीमा पड़ जाता है और अंडा देर से छूटता है। परीक्षा, नौकरी की शिफ़्ट, नींद की कमी, अचानक डाइटिंग या बहुत ज़्यादा कसरत के बाद पीरियड खिसकना इसी वजह से होता है।

क्या पीरियड लाने की गोली ख़ुद से ले लेनी चाहिए?

नहीं। इन दवाओं से रक्तस्राव हो जाता है, पर वह असली पीरियड नहीं होता और देरी की वजह जहाँ है वहीं रह जाती है। हर महीने ऐसा करने से गड़बड़ी बढ़ती है। ये दवाएँ डॉक्टर की सलाह से, कारण पता करने के बाद ही लेनी चाहिए।

क्या देर से पीरियड आना PCOS की निशानी है?

हो सकता है। भारत में लगातार देर से आने वाले पीरियड की सबसे आम वजह PCOS (अब PMOS) है, ख़ासकर जब साथ में चेहरे पर अनचाहे बाल, मुँहासे, वज़न बढ़ना या सिर के बाल पतले होना भी हो। पक्का करने के लिए सोनोग्राफ़ी, थायरॉइड (TSH), टेस्टोस्टेरोन और इंसुलिन की जाँच करवाएँ।

गुड़ और तिल कब से खाना शुरू करें?

आमतौर पर अपेक्षित तारीख़ से लगभग एक हफ़्ता पहले, रोज़ थोड़ी मात्रा में। दोनों गर्म तासीर के हैं, इसलिए सर्दियों में ये ज़्यादा सुहाते हैं और गर्मियों में मात्रा कम रखनी चाहिए। ज़्यादा खाने से फ़ायदा तेज़ नहीं होता, बस जलन और एसिडिटी होती है।

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