अनियमित पीरियड्स का आयुर्वेदिक इलाज: दोष, जड़ी-बूटियाँ और ईमानदार अपेक्षाएँ
BAMS (Bachelor of Ayurvedic Medicine & Surgery)

छोटा जवाब: आयुर्वेद अनियमित पीरियड को बच्चेदानी की समस्या नहीं, पूरे शरीर का असंतुलन मानता है। इलाज पाचन (अग्नि) सुधारने और जमा हुए आम को हटाने से शुरू होता है, उसके बाद जड़ी-बूटियाँ आती हैं। असर तीन से छह महीने में दिखता है, और कोई ईमानदार वैद्य PCOS को जड़ से मिटाने का वादा नहीं करेगा।
आपने भी सुना होगा कि अनियमित पीरियड के लिए अशोक या शतावरी ले लो, सब ठीक हो जाएगा। है ना? काश यह इतना सीधा होता।
हाँ, ये जड़ी-बूटियाँ असली हैं, सदियों से इस्तेमाल हो रही हैं, और मैं इन्हें अपने मरीज़ों को देती हूँ।
लेकिन आयुर्वेद में जड़ी-बूटी बाद में आती है। शास्त्र में पहले शोधन आता है, यानी शरीर को साफ़ करना, और उसके बाद शमन, यानी संतुलन बनाने वाली दवा। जो लोग सिर्फ़ चूर्ण खाकर नतीजे का इंतज़ार करते हैं, वे अकसर निराश होते हैं, क्योंकि जिस पाचन ने गड़बड़ी बनाई थी वह वैसा ही रहता है।
आयुर्वेद अनियमित साइकल को कैसे देखता है
पीरियड की गति वात के अधीन है, ख़ासकर अपान वायु के, जो शरीर में नीचे की तरफ़ के सारे बहाव चलाती है। जब वात बिगड़ता है तो गति अनियमित हो जाती है: कभी जल्दी, कभी बहुत देर से। ठंडा और सूखा खाना, लंबी भूख, कम नींद, ज़्यादा भागदौड़ और चिंता, ये सब वात बढ़ाते हैं।
दूसरा किरदार है अग्नि, आपकी पाचन शक्ति। अग्नि मंद हो तो भोजन ठीक से पचता नहीं और आम बनता है, यानी अधपचा चिपचिपा कचरा। यह आम स्रोतस (शरीर के सूक्ष्म रास्तों) में जमा होकर उन्हें जाम कर देता है। हार्मोन का संदेश उसी रास्ते से चलता है, और रास्ता जाम हो तो संदेश देर से पहुँचता है।
तीसरा है कफ़। जब आम और कफ़ मिलकर बढ़ते हैं तो भारीपन, सुस्ती, वज़न बढ़ना और रुकी हुई साइकल एक साथ दिखते हैं। PCOS वाली ज़्यादातर महिलाओं में मुझे यही कफ़-वात वाली तस्वीर मिलती है।
आधुनिक भाषा में यह वही बात है जो इंसुलिन रेज़िस्टेंस (insulin resistance) कहलाती है: शरीर पर इंसुलिन का असर कम, इंसुलिन ज़्यादा, एंड्रोजन ज़्यादा, अंडा नहीं छूटता। आयुर्वेद और आधुनिक जाँच, दोनों एक ही गड़बड़ी को अपने-अपने शब्दों में कहते हैं।
इलाज का क्रम, जो अकसर उलटा कर दिया जाता है
पहला: दीपन और पाचन (पाचन की आग जगाना)
यहीं से शुरू होता है। खाना गरम, पका और ताज़ा, नाश्ता समय पर, और दिन में तीन बार ठीक से खाना। खाने से पहले अदरक के छोटे टुकड़े पर सेंधा नमक और नींबू, या भोजन के साथ जीरा-अजवाइन का पानी। रात का खाना हलका और सोने से तीन घंटे पहले।
यह सुनने में बहुत साधारण है और यही सबसे ज़्यादा फ़र्क़ डालता है। जब तक पाचन ठीक न हो, जड़ी-बूटी का पूरा असर नहीं मिलता।
दूसरा: आम कम करना
जीभ पर सुबह मोटी परत, मुँह में चिपचिपापन, भारीपन और सुस्ती, ये आम के लक्षण हैं। इसे कम करने के लिए ठंडा, बासी, बहुत मीठा, तला हुआ, मैदा और दही रात में बंद करना पड़ता है। कुछ हफ़्ते हल्का भोजन, मूंग की खिचड़ी, सब्ज़ी का सूप और गुनगुना पानी बहुत काम आता है।
तीसरा: वात शांत करना
घी, भीगे बादाम, खजूर, तिल का तेल और नियमित दिनचर्या। हफ़्ते में दो बार गुनगुने तिल के तेल से पेट और कमर की मालिश (अभ्यंग) अच्छी लगती है और नींद सुधारती है। सोने-उठने का समय तय रखना वात के लिए दवा जैसा है।
चौथा: अब जड़ी-बूटियाँ
इस क्रम के बाद जड़ी-बूटियाँ अपना काम बेहतर करती हैं।
जड़ी-बूटियाँ, और हर एक किस काम की है
| जड़ी-बूटी | परंपरा में किस काम के लिए | ध्यान रखने की बात |
|---|---|---|
| अशोक | बच्चेदानी को मज़बूती देने और भारी रक्तस्राव को संभालने के लिए सबसे जानी-मानी जड़ी | भारी रक्तस्राव में ज़्यादा उपयोगी; वैद्य की देखरेख में |
| शतावरी | पोषण देने वाली, सूखापन और कमज़ोरी वाली स्थिति में | कफ़ और भारीपन ज़्यादा हो तो सोच-समझकर, यह भारी है |
| अश्वगंधा | तनाव और कॉर्टिसोल के दबाव को कम करने के लिए | थायरॉइड की दवा लेने वालों को डॉक्टर से पूछकर |
| दालचीनी | इंसुलिन की संवेदनशीलता सुधारने में, इस सूची में सबसे मज़बूत आधुनिक सबूत के साथ | रोज़ चौथाई से आधा चम्मच काफ़ी है |
| मेथी दाना | पाचन सुधारने और शुगर के उछाल को नरम करने में | रात भर भिगोकर सुबह ख़ाली पेट |
| त्रिफला | पेट साफ़ रखने और आम कम करने में | रात को गुनगुने पानी के साथ, थोड़ी मात्रा से शुरू |
| कांचनार गुग्गुल | गाँठ और कफ़ जमाव वाली स्थितियों में परंपरागत रूप से | यह वैद्य की सलाह वाली दवा है, ख़ुद से नहीं |
| अलसी | अतिरिक्त एस्ट्रोजन निकालने और सूजन कम करने में | पीसकर ही लें, वरना बिना पचे निकल जाती है |
एक ज़रूरी बात: यह सूची ख़रीदारी की पर्ची नहीं है। एक ही निदान वाली दो महिलाओं को अलग जड़ी-बूटियाँ दी जाती हैं, क्योंकि आयुर्वेद निदान नहीं, व्यक्ति का इलाज करता है। जिसका शरीर सूखा और कमज़ोर है उसे शतावरी सुहाती है; जिसका शरीर भारी और कफ़ वाला है, उसे वही शतावरी और भारी कर सकती है। इसीलिए एक साथ पाँच चीज़ें शुरू कर देना ठीक नहीं है।
पंचकर्म का सवाल
PCOS और अनियमित साइकल में परंपरागत रूप से विरेचन (नियंत्रित शोधन) और उत्तर बस्ती जैसी विधियाँ बताई गई हैं, और कई महिलाओं को इनसे फ़ायदा होता है। पर ये हर किसी के लिए नहीं हैं, और ये घर पर करने की चीज़ें नहीं हैं। सही समय, सही तैयारी और सही व्यक्ति के लिए ही ये सुरक्षित हैं, इसलिए किसी योग्य वैद्य के साथ ही।
असर कब और कितना
यहाँ मैं बहुत साफ़ रहना चाहती हूँ, क्योंकि इस विषय पर बहुत बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं।
पहले तीन महीनों में जो बदलता है वह अकसर साइकल नहीं होता: पाचन ठीक लगने लगता है, भारीपन और सुस्ती कम होती है, मीठे की तलब घटती है, नींद सुधरती है, और पीरियड का दर्द कम होता है। साइकल का नियमित होना आमतौर पर तीन से छह महीने में दिखता है। एक अंडे को पकने में ही पूरे तीन महीने लग जाते हैं, इसलिए इससे जल्दी नतीजा माँगना शरीर के साथ नाइंसाफ़ी है।
और यह भी सच है: PCOS एक स्थिति है जिसे संभाला जाता है, मिटाया नहीं जाता। आयुर्वेद इसमें बहुत मदद कर सकता है, ख़ासकर पाचन, वज़न, तनाव और साइकल पर। जो कोई कहे कि दो महीने में PCOS जड़ से ख़त्म कर देंगे, उससे दूरी रखिए।
आयुर्वेद और आपकी अंग्रेज़ी दवा साथ चल सकते हैं
बहुत मरीज़ मुझसे डरते-डरते पूछती हैं कि थायरॉइड की गोली या मेटफ़ॉर्मिन बंद कर दें? जवाब है, नहीं, अपने आप कुछ बंद न कीजिए। दोनों साथ चल सकते हैं, बस आपके दोनों डॉक्टरों को पता होना चाहिए कि आप क्या-क्या ले रही हैं। कुछ जड़ी-बूटियाँ थायरॉइड और शुगर की दवाओं के असर से मिलती हैं, इसलिए तालमेल ज़रूरी है, चुप्पी नहीं।
डॉक्टर से कब मिलें
मिलिए अगर तीन महीने से पीरियड नहीं आया, अगर ब्लीडिंग बहुत भारी है या सात दिन से ज़्यादा चलती है, अगर बहुत तेज़ दर्द है, अगर पीरियड के बीच में ख़ून आता है, या अगर आप गर्भधारण की कोशिश कर रही हैं। और आयुर्वेदिक इलाज शुरू करने से पहले एक बार जाँच करवा लीजिए, ताकि जो ठीक करना है वह पता हो।
साथ में यह भी पढ़िए: अनियमित पीरियड्स के घरेलू उपाय और समय से पहले पीरियड आने के कारण।
PCOS को पूरा समझना है?
अनियमित पीरियड की सबसे आम वजह PCOS है, और उसे आधा-अधूरा समझने से इलाज भी आधा-अधूरा रहता है। लक्षण, कारण, PCOD से फ़र्क़, ज़रूरी जाँचें और इलाज, सब एक जगह: PCOS क्या है: लक्षण, कारण और इलाज की पूरी गाइड।
जब आपको अपने लिए बना प्लान चाहिए
कोई भी लेख आपकी रिपोर्ट नहीं पढ़ सकता। यह बता सकता है कि क्या होता है और क्यों, लेकिन आपकी देरी की वजह थायरॉइड है, PCOS है, वज़न है या तनाव, यह जानने के लिए किसी को आपका पूरा इतिहास देखना पड़ता है। Qura में यही होता है। हमारी BAMS आयुर्वेदिक डॉक्टर आपसे 45 मिनट बात करती हैं, आपकी रिपोर्ट देखती हैं, और डाइट, आयुर्वेदिक दवा और नियमित फ़ॉलो-अप को मिलाकर 90 दिन का प्लान बनाती हैं जो जड़ पर काम करे।
हम यह नहीं कहेंगे कि PCOS ठीक हो जाएगा, क्योंकि कोई ईमानदार डॉक्टर यह नहीं कहता। हम यह कर सकते हैं कि आपकी साइकल के पीछे की असली वजह ढूँढें और उस पर काम करें।
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यह लेख जानकारी के लिए है और एक BAMS चिकित्सक द्वारा समीक्षित है। यह आपकी व्यक्तिगत चिकित्सकीय सलाह की जगह नहीं ले सकता। पीरियड्स की गड़बड़ी के कई कारण होते हैं, इसलिए कोई भी जड़ी-बूटी या इलाज शुरू या बंद करने से पहले किसी योग्य डॉक्टर से मिलें, ख़ासकर अगर आप गर्भवती हों, स्तनपान करा रही हों, या कोई दवा ले रही हों।
लिखा गया: डॉ. मेघा हल्दिया (BAMS), Qura Nutrition। (लेखिका का परिचय अंग्रेज़ी में है।)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
अनियमित पीरियड्स के लिए सबसे अच्छी आयुर्वेदिक दवा कौन सी है?
कोई एक सबसे अच्छी दवा नहीं होती, क्योंकि आयुर्वेद निदान नहीं बल्कि व्यक्ति का इलाज करता है। परंपरा में अशोक, शतावरी, अश्वगंधा, दालचीनी, मेथी, त्रिफला और कांचनार गुग्गुल का इस्तेमाल होता है, पर कौन सी आपके लिए ठीक है यह आपके शरीर की प्रकृति, पाचन और लक्षणों पर निर्भर करता है। एक साथ कई चीज़ें ख़ुद से शुरू न करें।
आयुर्वेदिक इलाज से पीरियड नियमित होने में कितना समय लगता है?
आमतौर पर तीन से छह महीने। पहले पाचन, नींद, ऊर्जा और मीठे की तलब में बदलाव दिखता है, और साइकल उसके बाद सुधरती है, क्योंकि एक अंडा तैयार होने में ही करीब तीन महीने लेता है। दो-चार हफ़्ते में साइकल बदलने का वादा भरोसेमंद नहीं है।
क्या आयुर्वेद से PCOS जड़ से ठीक हो जाता है?
नहीं, और कोई ईमानदार वैद्य या डॉक्टर यह दावा नहीं करेगा। PCOS (अब PMOS) एक ऐसी स्थिति है जिसे संभाला जाता है। आयुर्वेद इसमें असल में मदद करता है, ख़ासकर पाचन, वज़न, तनाव, साइकल और लक्षणों पर, और कई महिलाओं की साइकल नियमित हो जाती है। पर इसे मिटाने का वादा करने वालों से दूरी रखें।
क्या शतावरी हर महिला के लिए ठीक है?
नहीं। शतावरी पोषण देने वाली और भारी प्रकृति की है, इसलिए वह उन महिलाओं को सुहाती है जिनके शरीर में सूखापन और कमज़ोरी है। जिनमें कफ़, भारीपन, सुस्ती और वज़न बढ़ने की तस्वीर है, उनमें यह भारीपन बढ़ा सकती है। इसलिए इसे वैद्य की सलाह से लेना चाहिए।
आयुर्वेदिक दवा के साथ थायरॉइड या मेटफ़ॉर्मिन की गोली ले सकते हैं?
हाँ, दोनों साथ चल सकते हैं, पर अपने आप कोई भी दवा बंद न कीजिए और दोनों डॉक्टरों को पूरी सूची बताइए। कुछ जड़ी-बूटियाँ, जैसे अश्वगंधा और दालचीनी, थायरॉइड और शुगर की दवाओं के असर से मिलती हैं, इसलिए तालमेल ज़रूरी है।
PCOS में पंचकर्म ज़रूरी है?
ज़रूरी नहीं। ज़्यादातर सुधार खानपान, दिनचर्या, नींद और सही जड़ी-बूटियों से आता है। विरेचन और उत्तर बस्ती जैसी विधियाँ परंपरा में बताई गई हैं और कई महिलाओं को इनसे फ़ायदा होता है, पर ये हर किसी के लिए नहीं हैं और घर पर करने की चीज़ें नहीं हैं। ये किसी योग्य वैद्य की देखरेख में ही होनी चाहिए।
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